मानू का यादगार कैलेंडर 2026 ‘अठारह चराग़ एक रोशनी’


रात का सफर तय करके सूरज जब अंधेरी गुफ़ाओं से बाहर निकलता है तो सुबह यह पैग़ाम देती है कि अंधेरा छट गया है और रोशनी सामने खड़ी ज़िंदगी को नई राह दिखा रही है। फिर अंधेरा चाहे ज़िंदगी के हालात का हो या अज्ञानता का, उसे दूर करने का एक ही तरीका है-ज्ञान... और ज्ञान की शुरूआत निश्चित ही क़लम और कागज़ के सदुपयोग अर्थात पढ़ने-लिखने से ही हो सकती है। अज्ञानता के लिए उर्दू में एक शब्द है, जहालत। यह जीवन में सबसे बुरी अवस्थाओं में से एक है। देखा गया है कि हज़ारों, बल्कि लाखों लोग इस अवस्था से गुज़रते हुए महसूस ही नहीं करते कि उन्होंने खुद को और दुनिया में आने के मक़सद को बिना जाने ही सारी उम्र गुज़ार दी। अब जिन्हें अंधेरे में रोशनी मिल गयी, जिन्होंने अपने जीने की राह के पहले सिरे को पकड़ लिया, कुछ आगे बढ़ गये, उनका गुणगान ज़रूरी है। शायद इसी बात को महसूस करते हुए मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी ने अपने विद्यार्थियों को इस साल अपने कैलेंडर का नायक बनाया है, निश्चित रूप से इसमें छात्र-छात्राएँ दोनों शामिल हैं।

अठारह चराग़ एक रोशनीयही शीर्षक है इस कैलेंडर का। दर असल उस दिन मैं रीति काल पर एक संगोष्ठी में भाग लेने के लिए मानू में मौजूद था। मानू जाऊँ और कुछ पुराने दोस्तों से न मिलूँ, ऐसा बहुत कम ही होता है। प्रो. सरवरी मेरे बहुत पुराने मित्र हैं। जिन दिनों मैंने हिंदी मिलाप में रिपोर्टिंग शुरू की थी, वो मुंसिफ़ उर्दू दैनिक के लिए काम कर रहे थे। कुछ साल दैनिक सियासत में काम करने के बाद वो पत्रकारिता की मुख्य धारा छोड़ कर पत्रकारिता के अध्यापन के क्षेत्र में दाखिल हो गये, लेकिन पत्रकारिता में एक बार जब व्यक्ति आ जाता है तो कहते हैं, वह उसका पीछा नहीं छोड़ती। प्रो. सरवरी इन दिनों यूनिवर्सिटी के जनसंपर्क अधिकारी का प्रभार भी संभाल रहे हैं। उस दिन जब उनके कमरे में दाखिल हुआ तो उनके हाथ में नये साल 2026 का कैलेंडर था। उस पर नज़र पड़ी तो मैं चौंक गया। यह लाज़मी भी था, इसलिए भी कि कैलेंडर के पहले पन्ने पर डॉ. अबु मज़हर खालिद सिद्दीकी की तस्वीर देखकर मुझे हैरत हुई। डॉ. खालिद मेरे पुराने मित्रों में से हैं। आईआईआईटी में ईभाषा के राशिद भाई के साथ उनसे मेरी अकसर मुलाक़ातें होती रही हैं। जब मैंने कैलेंडर हाथ में लिया तो बहुत सारे चेहरे जाने पहचाने-से थे।

एक दौर था, जब अभी स्मार्ट फोन अभी हमारी जिंदगी का हिस्सा नहीं बना था। घर में टंगे कैलेंडर काफी अहमियत रखते थे और एक स्तंभकार के रूप में  मैंने कई साल तक हर साल मैंने जनवरी फरवरी के कुछ लेख, रेलवे और पर्यटन विभाग सहित कुछ प्रमुख संस्थाओं के कैलेंडर को  समर्पित किये हैं। हिंदी मिलाप के कला संस्कृति के पन्नों पर ऐसे कई लेख प्रकाशित हुए। चाहे वह प्रकृति का विषय हो या ऐतिहासिक धरोहरों का या फिर विज्ञान की नई अवधारणाओं का, कैलेंडर के बहाने कुछ न कुछ पढ़ने का अवसर मिल ही जाया करता था। कैलेंडर के पन्ने बदलने के साथ साथ हर महीना नई तिथियों के साथ कुछ अलग जानकारी मिलती। आज की तरह इंस्टंट कूकिंग नहीं, बल्कि अगले महीने का पन्ना अगले महीने ही पढ़ा जाता। चलिए इस कैलेंडर के पन्नों पर प्रकाशित चेहरों की बात करते हैं। मैंने विद्यार्थी जीवन में देखा है कि मीनार के उर्दू कैलेंडर खरीदने के लिए चारमीनार की दुकानों पर जनवरी में भीड़ सी जमा रहती थी। अब वो दौर पुरानी यादों का हिस्सा भर बन कर रह गया है। 

मानू के इस अठारह चराग़ एक रोशनी कैलेंडर के छह पन्ने हैं और हर पन्ने पर तीन सफल विद्यार्थियों की तस्वीर छपी है। जनवरी-फरवरी के पन्ने पर डॉ. हम्ज़ा मुतहर अबु अलशहमीरी ने वर्ष 2016 में कंप्यूटर साइंस में पीएचडी थी। वे साइबर सेक्यूरिटी कॉलेज ऑफ कंप्यूटिंग, इंजीनियरिंग एंड बिल्ड इन्वायर्नमेंट, बर्मिंघम सिटी यूनिवर्सिटी यूनाइटेड किंगडम में अध्यापन कर रहे हैं।

डॉ. अबु मज़हर खालिद सिद्दीक़ी ने वर्ष 2017 में अनुवाद अध्ययन में पीएचडी की है। वे विज़डम हाउस ट्रांस्लेशन एंड पब्लिकेशन एफजेड़ई शारजाह यूएई में निदेशक हैं। अनुवाद के क्षेत्र में कई उपलब्धियाँ उन्होंने अर्जित की हैं। विशेष रूप से अरबी, उर्दू, अंग्रेज़ी और फारसी के अलावा विभिन्न भाषाओं में काम कर रहे हैं। खालिद यूनानी और आयुर्वेदिक औषधियों में भी खास दिलचस्पी रखते हैं। हाल ही में उन्होंने गुलबर्गा के पास शेडम शहर में एक विवाह समारोह के अवसर पर बहुत ही खूबसूरत प्रदर्शनी आयोजित की थी।  

डॉ. शराफ़त हुसैन ने वर्ष 2020 में प्रबंधन में पीएचडी की, दुबाई की अमेरिकन यूनिवर्सिटी में मार्केटिंग के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। इसके साथ ही वे ईएम नर्मांदे बिजनेस स्कूल और बैलार यूनिवर्सिटी में भी अंशकालिक अध्यापक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


चूंकि मार्च महिला दिवस को लेकर महत्व रखता है, इसलिए मार्च-अप्रैल का पन्ना महिलाओं को समर्पित है। खदीजा मस्तूर ने वर्ष 2019 में बीटेक कंप्यूटर साइंस की डिग्री प्राप्त की है और वे क्वाल्कम में साफ्टवेयर इंजीनियर हैं। वह प्रौद्योगिकी के कई सारी विकास परियोजनाओं के साथ जुड़ी हुई हैं।

शाहना आलम ने 2021 में बीटेक उत्तीर्ण किया है। वे एक्सको पार्टनर्स मेलबोर्न में वरिष्ठ तकनीकी परामर्शी के रूप में कार्य कर रही हैं। कई तरह के ऐप निर्माण में वह महती भूमिका निभा रही हैं। इस पन्ने का तीसरा चेहरा हैं-अनम ज़फर का। उन्होंने वर्ष 2025 में शत प्रतिशत अंकों से नेट जेआरएफ उत्तीर्ण किया है। वह पीएचडी की स्कॉलर हैं।


मई-जून का पन्ने पर छाये डॉ. बिलाल मीर ने 2018 में ज़ूलॉजी में एचडी की है। स्कूल आफ बायोमेडिकल साइंसेज पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी में पोस्ट डॉक्टरोरल एसोसिएट के तौर पर काम कर रहे हैं। मोहम्मद हाशिम ने मानू से मार्च 2013 में डिस्टेंस मॉड से बीए किया था। वे जिला पश्चिम बंगाल सरकार में जिला एम्पलाई ऑफिसर हैं। ग्रुप ए ऑफिसर के तौर पर उनका सिलेक्शन हुआ है। तीसरी तस्वीर आकिब  इकबाल की है। उन्होंने 2019 में कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है। वे हैदराबाद में डेलीवेरू कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे हैं।


जुलाई-अगस्त का पन्ना जिन तीन लोगों को समर्पित है, उनमें सैयद माज़ अहमद ने मानू पॉलिटेक्निक हैदराबाद से 2015 में इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा किया है। वे यूके की इजी ग्रुप कंपनी में सेल्स एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर काम कर रहे हैं। मुहम्मद जाबिर ने 2008 में डिस्टेंस एजुकेशन में अंग्रेजी में एमए किया है। वे राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किए गए हैं।  शिक्षा के क्षेत्र में नए तौर तरीकों के लिए प्रधानमंत्री ने भी उनका सम्मान किया हैडॉक्टर हाशमी सैयद शोएब की उपलब्धियों का उल्लेख भी इसमें महत्वपूर्ण है। उन्होंने मास कम्युनिकेशन और में उर्दू में एमए किया है। वे महाराष्ट्र उर्दू अकादमी, मंत्रालय, मुंबई में सुपरिंटेंडेंट कम एग्जीक्यूटिव ऑफिसर तौर पर नियुक्त हैं।


सितंबर-अक्तूबर के पन्ने पर मौजूद इफ्तखार आलम ने 2008 में मास कम्युनिकेशन में एम ए किया है। वे पीआईबी में मीडिया एंड कम्युनिकेशन ऑफिसर बन गए हैं। इन दिनों वे पटना में नियुक्त हैं।  मोहम्मद अब्दुल रहमान ने एजुकेशन एंड ट्रेनिंग में 2015 में एमफिल किया है। वे तेलंगाना के माइनॉरिटी वेलफेयर डिपार्टमेंट में उर्दू ऑफिसर के तौर पर काम कर रहे हैं। शेख ओवैस ने 2010 में आईटीआई रेफ्रिजरेशन और एयर कंडीशनिंग का डिप्लोमा किया। वे एचवीएसी टेक्निशियन के तौर पर अफ्रीका के मोज़ाबिक में काम कर रहे हैं।


नवंबर-डिसंबर के पन्ने पर जिन की तस्वीरें हैं, उनमें रहीमुद्दीन ने 2012 में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए किया है। वे तेलंगाना के कमर्शियल टैक्स विभाग में वरिष्ठ सहायक हैं। डॉ. आफ़ाक नदीम खान ने 2017 में शिक्षा में पीएचडी की उपाधि अर्जित की और जामिया मिल्ली, नई दिल्ली में शिक्षा अध्ययन विभाग में असोसिएट प्रोफेसर बन गये। मुहम्मद परवेज़ आलम ने2017 में डायलेसिस टेक्निशियन डिप्लोमा किया और वे इन दिनों अबुधाबी डिफेंस अथॉरिटी में पैरामेडिक टीम में शामिल हैं।

मानू के इस वार्षिक कैलेंडर 2026 के पन्नों पर सजी ये 18 प्रेरणादायी हस्तियां केवल तस्वीरें नहीं, बल्कि संघर्ष, समर्पण और सफलता की जीवंत मिसाल हैं। प्रत्येक चेहरा अपने भीतर एक ऐसी कहानी समेटे हुए है, जिसने समाज, संस्कृति, शिक्षा, सेवा, कला सहित अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देकर नई पीढ़ी को प्रेरित करने का कार्य किया है। यह कैलेंडर केवल तिथियों का संग्रह नहीं, बल्कि उन उपलब्धियों का दस्तावेज़ है, जो आने वाले समय को दिशा देने का सामर्थ्य रखती हैं। इन सभी व्यक्तित्वों की यात्राएं हमें यह संदेश देती हैं कि मेहनत, लगन और सकारात्मक सोच से हर लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। समय के साथ ये पन्ने भले बदल जाएं, लेकिन इन उपलब्धियों की चमक और प्रेरणा सदैव लोगों के दिलों में जीवित रहेगी।

 

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