Posts

बर्फ़ वाले डॉक्टर साब

Image
यह उन दिनों की बात है जब मैं उर्दू दैनिक मुन्सिफ़ के लिए   ' हुजूम में चेहरा '  कॉलम लिख रहा था। इस कॉलम के बहाने हर हफ़्ते किसी न किसी से मिलना और उनसे उनकी कहानियाँ सुनना एक दिलचस्प सिलसिला चल निकला था। इस कॉलम के लिए लगभग तीन सौ कहानियाँ लिखी।   1999   से   2005   के बीच लिखी गई इन कहानियों के कुछ हिस्से मैं इस डिजिटल दुनिया को सौंप रहा हूँ। पहली कहानी है.. बर्फ़ वाले डॉक्टर साब सफलता और असफलता दो ज़रूरी चीज़ें हैं , जो इंसान की ज़िंदगी में काफ़ी महत्व रखती हैं, क्योंकि ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव इन्हीं पर निर्भर करते हैं। कुछ लोग ज़िंदगी के किसी पड़ाव पर तराज़ू के एक पलड़े में अपनी और दूसरे में अपने दोस्तों , पड़ोसियों और जान-पहचान वालों की ज़िंदगी को तौलने के आदी हो जाते हैं, लेकिन कुछ चेहरे ऐसे भी हैं , जो सफलता और असफलता के इन दो पलड़ों से अलग-थलग , अपने तरीके से अपनी ज़िंदगी जी रहे हैं , जैसे अपने दिन गिन रहे हों या बस ऐसे ही गुज़ार रहे हों, लेकिन उसमें भी उनका अपना रस है, अनुभव है, आनंद है। सोचता हूँ वो लोग किस हालत में जी रहे होंगे जो न तो निर...

शादी, वलीमा, कला-संस्कृति, साहित्य और जड़ी बूटियाँ

Image
दकन के छोटे से शहर सेड़म की यादगार यात्रा   घर से निकला तो दो बजने को अभी कुछ वक़्त बाक़ी था। ख़याल यही था कि जो भी उधर की बस मिलेगी सवार हो जाऊंगा। स्टॉप पर पहुँचने के कुछ देर बाद ही एक बस आती दिखाई दी।   ये जानकर भी कि वो बस मंज़िले मक़सूद ( लक्षित गंतव्य स्थल ) तक नहीं पहुंचाती, उसमें सवार हो गया। यही सोचकर कि अगले स्टेशन पर कुछ और बसें रुकती हैं। कुछ दूर पहुंचने पर बस के पिछले शीशे से झांक कर देखा तो पाया की चेवेल्ला की बस पीछे आ रही है। दिल ही दिल में सोचने लगा कि अगले बस स्टॉप पर उतर कर उसमें सवार हुआ जाए, लेकिन इस सोच को एक मिनट भी नहीं पाल सका था कि पिछली बस ओवर टेक करते हुए आगे निकल गयी। खैर काली मंदिर पर उतरने के बाद मैं अगली बस का इंतज़ार करने लगा। इंतज़ार बिल्कुल लंबा नहीं था। कुछ ही मिनट में, मैं विक़ाराबाद जाने वाली बस में सवार एक सीट पर बैठ चुका था। दिमाग़ के किसी कोने में खुशी का एहसास जागने लगा था कि सब कुछ प्लान के मुताबिक़ हो रहा है।   गूगल मैप पर देखा तो बस के विक़ाराबाद पहुँचने और वहां से हुसैन सागर एक्सप्रेस छूटने में सिर्फ अठारह मिनट का अंतर। उधर ...

दिल हूम हूम करे.. आइसक्रीम का स्वाद और भूकंप के झटके

Image
गुवाहाटी हवाई अड्डे के डिपार्चर वाले हिस्से में कुर्सी पर बैठा मैं अपने विमान के आने का इंतज़ार कर रहा था कि अचानक फर्श कंपकंपाने लगा। कुछ ही सेकंड में वह कंपकंपाहट तेज़ हुई और ऐसा महसूस हुआ कि कोई पकड़कर इमारत को ज़ोर से हिलाने की कोशिश कर रहा है। सिर्फ कोशिश...पहले दिमाग़ में यही आया कि कोई विमान शायद इमारत के नीचे घुस गया है, लेकिन कुछ ही सेकेंड में समझते देर नहीं लगी कि कुछ बड़ा हुआ है। कुछ लोग कुर्सियों से उठकर भागने लगे। हालाँकि कुछ ही सेकेंड बाद कंपकंपाहट कम हुई और लोग घबराहट में ही सही जहाँ तहां सहम गये और अपनी कुर्सियों पर आ बैठे। सब अपने रिश्तेदारों और नजदीकी मित्रों से सेलफोन पर उस घटना की सूचना देकर कुशमंगल पूछने लगे। 14 सितंबर (2025, शाम के लगभग 5 बज रहे थे।   मुख्यमंत्री के मेहमान असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के मेहमान और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में एक विशेष प्रतिनिधि के रूप में भाग लेने के लिए गुवाहाटी की यात्रा का इस तरह अजीब परीस्थितियों में समाप्ति को पहुँचना, था तो कुछ अजीब सा, लेकिन ऐसा था तो था, अब भला उसे कौन बदल सकता है। ...

रंगों के साथ हंसने, रोने और जीये जाने वाली कलाकार जया बाहेती

Image
जीवन तो एक ही है , लेकिन वह किसी के लिए विस्तार है तो किसी के लिए सारांश। कोई उसे फैला रहा है तो कोई समेट रहा है। किसी के लिए बिल्कुल फीका तो किसी लिए इंद्रधनुष की छटाओं की तरह रंगारंग। हैदराबाद की प्रतिष्ठित चित्रकार जया श्री बाहेती के लिए जीवन रंगों से भरा हुआ है। बीते तीन दशकों से अधिक समय में उन्होंने कैन्वस पर रंगों की आड़ी तिरछी , गोल और कभी - कभी समानांतर लकीरों से हज़ारों आकृतियां उकेरी हैं। बंजारा हिल्स में उनकी छोटी सी गैलरी का अवलोकन करते हुए हम पाते हैं कि उन्होंने भारतीय संस्कृति की धरोहर से प्रतीकों को अपने चित्रों में कुछ इस तरह उकेरा है कि श्वेत श्याम चित्रों में भी चटख़ते हुए रंगों की छटाओं के छुपे रहने का एहसास होता है।   कला समीक्षक जॉर्जिना मैडॉक्स उनके बारे में कहती हैं कि जया बाहेती अपने चित्रों में जीवंत लेकिन शांत रंगों की एक अमूर्त पृष्ठभूमि का निर्माण   करती हैं , उनके चित्र दर्शकों में सहानुभूति भर देते हैं , कोमलता का एहसास जगाते हैं। पृथ्वी ,  जल ,  अग्नि ,  वायु और आकाश जैसे तत्वों को मिश्रण भी उनके चित्रों में मिलता है।   वह ज...