मौत के साये में ज़िंदगी का हौसला
ज़िंदगी कितनी खूबसूरत है , अगर यह देखना हो तो इसे मौत के साथ जोड़कर देखिए। यकीनन जिंदगी और मौत के बीच इतना कम फासला है कि इसे नापा भी नहीं जा सकता। हंसती-मुस्कुराती जिंदगी लम्हे भर में कब मौत की वादी में उतर जाए , पता ही नहीं चलता। माना कि मौत का एक दिन तय है और हम यह भी जानते हैं कि वह किसी भी वक़्त आ सकती है , फिर भी ज़िंदगी जिये जाने का हौसला ज़िंदा दिली में छुपा है। हम मौत को बार-बार याद करके पल-पल इसलिए नहीं मरते, क्योंकि हमें उस दिन के बारे में पता नहीं होता , लेकिन अगर किसी को मालूम हो जाए कि वह पांच दिन , पांच महीने या पांच साल बाद मरने वाला है , तो सोचिए उसकी जिंदगी कैसी होगी ? जिंदगी के प्रति उसका क्या रवैया होगा ? दुनिया की चकाचौंध में व्यस्त हम उन लम्हों का अंदाजा भी नहीं लगा सकते , लेकिन ऐसे नाजुक हालात में अगर कोई हिम्मत नहीं हारता और हौसले के साथ जीता है , तो वह शख्स बेशक न केवल प्रेरक होता है, बल्कि जब भी मौत और ज़िंदगी की बात छिड़ जाती है, याद आ जाता है। एक पत्रकार और लेखक के रूप में यूं तो जिंदगी में अनगिनत किरदारों का सामना हुआ। कुछ की कहानी कल...