स्थानीय मुद्दों की पत्रकारिता के पर्याय - अख्तर काज़मी
दाएं से.. अख़्तर काज़मी, रफ़ीक़ जाफ़र और एफ एम सलीम समय रुकता नहीं है, किसी के कहने से भी नहीं, हाँ हम ज़रूर कहीं रुक से जाते हैं, किसी लम्हें में, स्मृतियों के किसी हिस्से में। पत्रकार और लेखक अख़्तर काज़मी के साथ भी कुछ ऐसे ही लम्हें यादगार रहे हैं। पुणे में हिदायतुल्ला रोड पर पुणे कॉलेज ऑफ आर्ट्स , साइंस एंड कॉमर्स है, जिसे अंजुमन खैरुल इस्लाम ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जाता है। मुंबई से लौटने के दौरान सोचा कि एक शाम पुणे में गुज़ारी जाए। रफ़ीक़ जाफ़र साहब से मिलकर बहुत दिन हुए थे। कुछ घंटे के लिए ही सही, वे इस उम्र में भी तलेगांव से वहाँ आते हैं। आज़म कैंपस के प्रवेश द्वार के ठीक सामने डेक्कन मुस्लिम इंस्टीट्यूट की ऐतिहासिक और बेहद लोकप्रिय ए.आर.एस. इनामदार पब्लिक है , जो छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए एक प्रमुख अध्ययन केंद्र है। इसी रीडिंग रूम के एक कोने में पुस्तकालय अध्यक्ष का कमरा है,यहीं पर रफ़ीक़ साहब के साथ बस कुछ मिनट के लिए, सब कुछ मिला लें तो एक घंटे से कुछ ज़्यादा का समय हो सकता है, अख़्तर काज़मी से मुलाक़ात होती है, हालाँकि फोन पर उनसे र...